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बेशक होता है

beshak hota hai

प्रमोद वर्मा

अन्य

अन्य

प्रमोद वर्मा

बेशक होता है

प्रमोद वर्मा

और अधिकप्रमोद वर्मा

    बेशक होता है

    हवा का भी रंग

    और ख़ुशबू का भी स्वाद

    वरना जगहें

    अपने आसमानों से कैसे पहचानी जा सकती थीं?

    कोयल की तरह

    निरंतर उछालते रहो

    हवा में सवाल

    उत्तर एक दिन

    ज़रूर पाओगे।

    क्या हुआ जो

    बेमौसम हो रही है बरसात

    ज़रूरी नहीं बुरा ही

    कुछ अप्रत्याशित अच्छा भी तो हो सकता है।

    चिंता की बात नहीं है

    अनुराग जितना बढ़ाता है

    उदासीनता

    उससे अधिक नहीं घटा सकती।

    विश्वास हो तो

    नदी से पूछ लो।

    सड़क-बत्ती के नीचे आकर पदचाप

    एक चेहरा हासिल कर लेती है।

    वह बूँद भर रौशनी का चेहरा होता है।

    स्रोत :
    • पुस्तक : साक्षात्कार 179-180 (पृष्ठ 95)
    • संपादक : प्रभात त्रिपाठी
    • रचनाकार : प्रमोद वर्मा

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