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बसाउ अपन गाम

basau apan gaam

श्याम दरिहरे

श्याम दरिहरे

बसाउ अपन गाम

श्याम दरिहरे

और अधिकश्याम दरिहरे

    गाममे जाधरि मोनसँ

    बारह बरन मिलिकऽ

    गाड़ैत छल भैरवक धूजा

    करैत छल बड़क गाछ तर

    सरधासँ बरहम बबाक पूजा

    गाम नै छलैक एहन जबदाह।

    पूजा तँ आबहु होइअए, मुदा

    आब तँ रोट बनब अछि पराभव

    मोसकिल छै तसमै रान्हब।

    बाधमे जा अगहन उमकैत रहय

    बोझ उघलाक बाद

    चौबटिआपर बैसि

    सब एकेठाम

    लाइ-मुरही फँकैत रहय

    अगहनीक शानमे जा

    मूसोकेँ होइत रहलइ

    सात-सात गो बिआह

    ता कहाँ छलै अपन गाम एहन जबदाह।

    के करत पूरन पासमानक भगतइ

    आब सलहेसक थान

    बिति गेलै आल्हा सलहेसक गान

    आब होइ छै थहाथही

    खाली दारुक दोकान

    जानि ने कोना भऽ गेलैक लोकक

    एहन गेआन।

    गामो कहाँदन ऐलि-फैलि भेलैए

    गाम छोड़ि सब कलकत्ता-पंजाब गेलैए

    अपन चास-बास बेसी परते रहै छै

    मोनक बात मोनमे सड़िते रहै छै

    सबहक मोन लगैत छै जबकाह

    सौंसे गाम मने भऽ गेलैक घबाह।

    कीर्त्तनक बदला तास-गाँजाक जुटान छै

    मंगनीक बीपीएल, मनरेगा महान छै

    ठीकेदारोक जय-जय

    मजूरोक जय-जय

    बिनु मेहनतिए जहिआसँ

    भरऽ लगलइ पेट,

    आबऽ लगलइ पाइ

    तहियासँ कमौओ सब

    कोढ़ि भेल जाइ छै भाइ।

    जकरा नै छै संविधानक पौआ

    की नै छै कोनो गतात

    तकरा एखनो कहाँ जुटइ छइ बुतात

    सब आइओ कनैए हकन्न

    ने जेबीमे पाइ, ने थारीमे अन्न।

    सबहक बच्चा रस्तेपर हगतइ

    गूँहे लग बैसतइ

    गूँहे लग खेतइ

    तखन रंग-बिरंगक बेमारीमे

    घरारी नै बिकेतइ?

    गूँह संग जीअब भऽ गेल छै आदति

    से झाजी, की चौधरीजी

    की पासमान, की कामति

    एकाधटा टोल फरेस

    बाकी टोल हगनेस।

    रास्ता घेरब बड़का पुरुखारथ

    बेइमानी नंगटइमे बड़का महारत

    कहबइ तँ केस करत

    मरत तँ जेना रस्तेपर जरत!

    बेइमान मिलिकऽ बुड़िबककेँ भड़काओत

    दसगर्दा काजमे भांगठ लगाओत।

    हइ! मरबह तँ जरबह नै हौ बेइमान ली

    डर ने होइ छह किए!

    सबटा देखैत छथुन भगमान।

    की कहलहुँ—

    हमहीं किए ने दइ छिअइ सुधारि?

    बाबू!!

    गाममे दू-चारिटा बनमानुख अखनो जीबैए

    जे अनके बझाकऽ

    अपन गोटी लाल करैए।

    सब मिलिकऽ तँ हमरे सुधारि देत

    सबटा हमर बुधिआरी ठामे घुसारि देत।

    असगर ककरो नै लागत पार।

    तें कहइ छी—

    आउ आउ!!

    सबगोटा मिलि जाउ

    अपन-अपन स्वार्थ छोडू

    कने गामोक परवाह करू

    अहूँ बाँचब तखने

    जखन गाम बाँचत

    नै तँ

    सब होयब तबाह

    भऽ जायत सबटा सुड्डाह।

    गामे अछि अपन पहिचान

    पूर्वजक जन्मस्थान

    बान्हू कसिकऽ फाँड़

    चलू फेरसँ बसाबी अपन गाम।

    स्रोत :
    • पुस्तक : क्षमा करब हे महाकवि [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 21)
    • रचनाकार : श्याम दरिहरे
    • प्रकाशन : नवारंभ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2016

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