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जब मैं पढ़ रहा था

फ्लुइड मैकेनिक्स के जटिल सूत्र

और बाँधो के बनाने के सिद्धांत

तो तभी मेरी कल्पना में आया

बाँध बनने के बाद का

विशाल जलाशय

जलाशय में डूबी भूमि

और भूमि के विस्थापित बाशिंदे

मैं पढ़ रहा था

अर्थ फिल डैम

बनाने के सिद्धांत

और मुझे ध्यान आया टिहरी

और उसका वो अंतिम दिन

जब उसके लोग

ढो रहे थे अपना सामान

और देख रहे थे

आख़िरी बार अपने घरों को

जो थीं उनके पिताओं की

उनको सौंपी गई

आख़िरी ज़ागीरें

जिस दिन मैंने

सीखी निकालनी

बाँध की सेंटर ऑफ़ ग्रेविटी

उस रात मेरे सपने में आए

टिहरी के

वो डूबे हुए गाँव

जो थे बाँध की

सेंटर ऑफ़ ग्रेविटी पर

अगले दिन

मैंने अध्यापक से पूछा

जिन्होंने गढ़े डैम बनाने के सिद्धांत

क्या उन्होंने गढ़े है

विस्थापितों के

दुख कम करने के सिद्धांत

उन्होंने यह कहकर

कि विस्थापित नहीं हैं

हमारे सिलेबस का हिस्सा

चुप करा दिया मुझे

वैसे ही

जैसे इतिहास में बने

तमाम बाँधों के विस्थापितों

को कर दिया गया था चुप

स्रोत :
  • रचनाकार : मोहित नेगी 'मुंतज़िर'
  • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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