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आजीक दम्मा सन राति

ajik damma san rati

सुमित मिश्र गुंजन

सुमित मिश्र गुंजन

आजीक दम्मा सन राति

सुमित मिश्र गुंजन

और अधिकसुमित मिश्र गुंजन

    भोरका सुरुज सिनूर छैक

    जाहि सँ

    सेनुराओल जाइत छैक

    हरियर नूआ पहिरने बैसल

    पुबरिया बाधक सिउँथ

    हुलसित होइ छै खेत-पथार

    स्वागत करै छै चिड़ै-चुनमुन्नी

    दुपहरिया सुरुज पुरुषार्थ छैक

    एकर प्रभाव सँ

    प्रभावित होइ छै समूचा प्रकृति

    टक-टक रौद

    शीतलता उष्णता दुनूक मिज्झर छै

    दया झाँपल रहै छै क्रोध सँ

    नहुँ-नहुँ होइ छै साँझ

    अकास सँ खसय लगै छथि दिनमान

    साँझुक सूर्ज थकनी छै

    जेना कि

    हाड़ तोड़िक' काज करैत लोकक

    थाकल रहै छै देह

    हाँफै छै आत्मा धरि

    एहिना हरेक साँझ समाप्त होइ छै

    एकटा नवल भोरक शर्त पर

    किरिन डूमिते

    खिड़की केबाड़क दोग सँ

    हुलकी मारै छै अन्हार

    सियाह राति

    हमर बुढ़िया आजीक दम्मा सन छै

    खोंखैत रहै छै आजी

    ससरैत रहै छै राति

    डूमैत रहै छै गाम

    औनाइत रहै छै कुकूर

    असहाय होइ छै तरेगन

    आँखि मे पैसल रहै छै निद्रा

    रातिक कोनो छोर पर

    लड़ैत रहै छै सूर्ज!

    स्रोत :
    • पुस्तक : पेटकुनियाँ लधने प्रश्न (पृष्ठ 39)
    • रचनाकार : सुमित मिश्र गुंजन
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2024

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