Font by Mehr Nastaliq Web

अजायबघर

ajayabghar

गीता मलिक

गीता मलिक

अजायबघर

गीता मलिक

और अधिकगीता मलिक

    मेरे पास एक अजायबघर हैं

    एक अपार्टमेंट के दो कमरे

    कटहल का पुराना पेड़

    एक दीवार पर टंगी है

    उन्नीस सौ सत्तानवे की एक रात

    एक टेबल पर पड़ा है

    छत्तीस साल की डायना की मृत्यु की ख़बरों से भरा हुआ अख़बार

    एक कच्ची उम्र का नीला धुआँ

    जो पहली माहवारी की तरह दर्दनाक और डरावना था

    और उससे भी अधिक डरावना था

    एक अधेड़ का जंघा पर घृणित स्पर्श

    एक ऊभ चुभ की कौंध से भरी लेजर लाइट

    कमरे की अलमारी में बिछे

    अख़बार की तह में छिपी

    प्रेम की पहली पाती

    जो तलाश रही थी प्रेमी का पता

    सपने में आकर डरातीं

    वह सहपाठिन

    जिसकी कंठी टूट गईं थी खेल खेल में

    और कितना डर गई थी मैं

    उसके रोने से

    कभी-कभी अजायबघर की छत पर

    उल्टा चलता हुआ दिखता है

    दुनिया की सबसे सुंदर चाल वाला वह लड़का

    जिसकी अंत्येष्ठि की गई थी

    मात्र सोलह की उम्र में

    दिसंबर की एक सर्द रात में

    एक कपटी साया उतर आता

    स्याह घने कटहल तले

    और अजायबघर में फैलाना चाहता हैं

    काला धुआँ

    अजायबघर भर रहा हैं

    और भरता ही जा रहा हैं

    दिन प्रति दिन!

    स्रोत :
    • रचनाकार : गीता मलिक
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY