आधुनिक हिंदुस्तान
adhunik hindustan
मुफ़्त राशन माँगने की पंक्ति में बूढ़ा मिला,
नाम पूछा उससे तो बोला कि ‘हिंदुस्तान’ है।
अपने घर में ही उसे रोटी मयस्सर हैं नहीं,
तभी लंबी पंक्तियों में लगा वो इंसान है।
वो अठहत्तर साल का है अजनबी-सा घूमता,
उसकी हत्या करने की साज़िश में कुछ शैतान हैं।
उसके बेटों ने नहीं उसको दिए कपड़े तलक,
अर्द्ध नंगा, फटे कपड़ों में है वो परेशान है।
उसके बेटे ऐश करते, उसकी ही संपत्ति पर,
अपनी ही संपत्ति से वो बेदखल, हैरान है।
अपनी ऐसी दुर्दशा का दुःख उसे उतना नहीं,
जितना अपने चार पुत्रों की कलह से म्लान है।
उसके पुत्रों की निरंतर, हो रही है अवनति,
वो सभी उस ‘फूट वाली चाल’ से अनजान हैं।
घर से कोसों दूर बूढ़ा बैठा है माथा पकड़,
उससे थोड़ी दूर पर ही, शहर का श्मशान है।
- रचनाकार : सूर्य प्रकाश शर्मा
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
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