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कला लेखन

कथेतर गद्य-विधा का एक रूप कला-लेखन के रूप में विकसित हुआ है। इस विधा में विभिन्न कला-रूपों के परिचय, उनका ऐतिहासिक क्रम और विकास-यात्रा, कला-शैलियों पर निबंध, कला-संबंधी समीक्षाएँ आदि शामिल की जाती हैं। केंद्रित विषयों में चित्रकला, नाट्य-कला, विभिन्न शिल्प और वास्तु-शिल्प, प्राचीन भारतीय कला-शैलियाँ आदि प्रमुख हैं।

द्विवेदीयुगीन कला-समीक्षक और निबंधकार। भारतीय चित्रकला पर विचार में आरंभिक योगदान के लिए उल्लेखनीय।

द्विवेदीयुगीन निबंधकार। नाट्य-समीक्षा में योगदान।

1925 -2016

समकालीन महत्त्वपूर्ण चित्रकार, कला-समीक्षक और लेखक। चित्रकला की काशी शैली और समीक्षावाद से संबद्ध।

बीसवीं सदी के तीसरे दशक में सक्रिय कला-विषयक निबंधकार। देशी-विदेशी चित्रकला और चित्रकारों पर आरंभिक लेखों के रूप में योगदान के लिए उल्लेखनीय।

1892 -1980

प्रसादयुगीन महत्त्वपूर्ण कवि-गद्यकार-संपादक और कला-इतिहासकार। भारतीय कला आंदोलन में योगदान और गद्य-गीत के प्रणयन के लिए उल्लेखनीय।

द्विवेदीयुगीन निबंधकार। नृत्य-कला पर समकालीन लेखन।