युग बदलल जमाना बदलि गेल छै
yug badlal jamana badali gel chhai
युग बदलल जमाना बदलि गेल छै
विकृतिक रंग मुँहपर लेभरि गेल छै।
रहल प्रकाश ओ ने रहय जे तखन
पशुओ देखि वोनमे भरमि गेल छै।
जप्त गांडीव पांडव जहलमे पड़ल
कृष्ण-शकुनीमे जुआ पसरि गेल छै।
द्रौपदीक हाल पर ने कननिहार क्यो
मुखिया लग गहूम लेल तरसि गेल छै।
दया करुणा बनल रक्त लोभी चिता
बुद्धदेवोपर हिंसा नमरि गेल छै।
- पुस्तक : कान्ह पर लहास हमर [मैथिली गजल संग्रह] (पृष्ठ 10)
- रचनाकार : कलानन्द भट्ट
- प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
- संस्करण : 1983
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.