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ठहकल चौकिदार

thahkal chaukidar

विभूति आनंद

विभूति आनंद

ठहकल चौकिदार

विभूति आनंद

और अधिकविभूति आनंद

    आँखि स' बहि रहल, दहो-बहो नोर

    अन्तर्मन व्यथित'छि, क' रहल सोर

    पोर-पोर टूटैए, जूटैए फिक्र कहाँ

    मोसम'छि निर्दयी, पुरिबा सहजोर

    लागैए जेना, साँस-क्रिया बाधित हो

    शारीरिक स्थिति, बनल जनु कठोर

    राँड़ी-बेटखौकी पर, टूटैए निन्न रोज

    गाम नञि सुधरतै मने, जमल छै सोड़

    देह के सोहरा रहल, शीतल बयार

    कर्णप्रिय पराती कतौ, भ' रहल भोर

    चिंतन लगए एना जेना, तुबैत सिंगरहार

    मोनक अन्हार बीच, राति जनु इजोर

    राति रहए मातल, ठहकल चौकिदार

    उचटल निन्न, मने पैसल छल चोर

    स्रोत :
    • पुस्तक : उठा रहल घोघ तिमिर (पृष्ठ 31)
    • रचनाकार : विभूति आनन्द
    • प्रकाशन : भारती संस्थान, पटना
    • संस्करण : 1981

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