नहि रूप-रंग-स्वाद आ ने गंध लिखै छी
nahi roop rang svaad aa ne gandh likhai chhi
आनन्द मोहन झा
Anand Mohan Jha
नहि रूप-रंग-स्वाद आ ने गंध लिखै छी
nahi roop rang svaad aa ne gandh likhai chhi
Anand Mohan Jha
आनन्द मोहन झा
और अधिकआनन्द मोहन झा
नहि रूप-रंग-स्वाद आ ने गंध लिखै छी
रोटीक संग भूखक अनुबंध लिखै छी।
जबकल रहै करेजमे कष्टक जुआरि जे
से तोड़ि बहल नोरक तटबंध लिखै छी।
बेटाक बाद पोता गद्दी कोना गहत
तै लेल भेल कोन-की प्रबंध लिखै छी।
देखल लगीचसँ जखन समाजकेँ चलनि
महकैत विषानि सोचक दुर्गन्ध लिखै छी।
विद्वान जे छलाह से पैकार भ' गेला
साहित्यसँ बजारक जुड़िबंध लिखै छी।
अंतर होयबाक चाही किछु गद्य-पद्यमे
कविताक नाम पर किए निबंध लिखै छी।
- पुस्तक : तेँ ओ बजलैए (पृष्ठ 34)
- रचनाकार : आनन्द मोहन झा
- प्रकाशन : नवारम्भ, मधुबनी/पटना
- संस्करण : 2023
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