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मोहब्बतका तेरी तक़रीर में

mahobat ka teri taqrir mein

मनजीत भोला

मनजीत भोला

मोहब्बतका तेरी तक़रीर में

मनजीत भोला

और अधिकमनजीत भोला

    मोहब्बत का तेरी तक़रीर में पैग़ाम होता है

    मगर सूबे में इस के बाद कत्लेआम होता है

    नया दस्तूर है यारो नए दौरे–सियासत का

    यहां मक़तूल के सर पे कोई इल्ज़ाम होता है

    गटर में मर गया रमलू मगर हैरत हुई सुनके

    सुना तमगा सफ़ाई का सचिन के नाम होता है

    ख़ज़ाना ही नहीं सारा वतन अब दाँव पे रखदो

    बड़े मुज़रिम के सर पे गर बड़ा ईनाम होता है

    तजरबा है मिरा साकी मैं कैसे माँगलू तुझसे

    मना करते जो उनके हाथ में ही जाम होता है

    जाने किन मुक़ामों पे हमें पहुँचा दिया तुमने

    नज़र गर तुम आओ तो हमें आराम होता है

    स्रोत :
    • रचनाकार : मनजीत भोला
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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