लूट जाला सब खज़ाना, दोस्ती के वार से
loot jala sab khazana, dosti ke vaar se
लूट जाला सब खज़ाना, दोस्ती के वार से,
दुश्मनी के बात कइसन, दोस्त मरलख प्यार से।
मतलबी बनके सटे ला, फायदा से नाम ली,
काम होते काट देवे, नेह नाता आर से।
जब समय आइल मदद के, खूब चालाकी भइल,
मोड़ लिहले मुँह छुपा के, लौटनी दूआर से।
- पुस्तक : गुजर रहल बा जिन्दगी (कविता-संग्रह) (पृष्ठ 128)
- रचनाकार : अनीता साह
- प्रकाशन : ओरिएन्टल पब्लिकेशन हाउस प्रा. लि., काठमांडू, नेपाल
- संस्करण : 2025
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