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के बा आपन, कवन पराया

ke ba aapan, kavan paraya

ब्रजभूषण मिश्र

ब्रजभूषण मिश्र

के बा आपन, कवन पराया

ब्रजभूषण मिश्र

और अधिकब्रजभूषण मिश्र

    के बा आपन, कवन पराया, कइसे के पहिचानब जी

    छोट जगहिया, गोड़ पसारब, कइसे चादर तानब जी

    एके अँगना छीपा बाजल, घड़ियो-घंट सुनाइल बा

    घर सउरी के भा मउअत के, कइसे रउआ जानब जी

    सबके मन में घुरुची बाटे, घेंट कटउअल जारी बा

    अइसे में केकरा के कइसे अँकवारी में बान्हब जी

    छपले बाटे घोर अन्हरिया, कहीं अँजोरिया भुला गइल

    समय-साँप फुफुकारत बाटे कइसे एकरा मारब जी

    अँउजाइल बा जिनगी-जिनगी, गाँव भइल बा धुआँ-धुआँ

    लकड़ी-काठी ओद बुला बा, कइसे अगिया जारब जी

    स्रोत :
    • पुस्तक : समय के राग (पृष्ठ 76)
    • संपादक : जगन्नाथ, भगवती प्रसाद द्विवेदी
    • रचनाकार : ब्रजभूषण मिश्र
    • प्रकाशन : भोजपुरी साहित्य प्रतिष्ठान, पटना
    • संस्करण : 2003

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