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झगड़ा कियै बझल छै गामक सिमानपर

jhagDa kiyai bajhal chhai gamak simanpar

बाबा बैधनाथ

बाबा बैधनाथ

झगड़ा कियै बझल छै गामक सिमानपर

बाबा बैधनाथ

और अधिकबाबा बैधनाथ

    झगड़ा कियै बझल छै गामक सिमानपर

    पहरा कोना लगयबै लोकक इमानपर

    द्वेषक छै आगि लेसन धू-धू जरैए बस्ती

    नेता कोना हँसैए अप्पन गुमानपर

    भूखल मरै छी निशिदिन मेहनति सदति करी

    करजोक बोझ बड़का लादल-ए जानपर

    नाङट उघार हम छी पहिरब पटोर कोना

    संतोष कऽ रहल छी फाटल-पुरानपर

    पंचमंजिला भवनमे जिनगी हुनक बितनि

    बन्हक पड़ल छी हमसभ ककरो दलानपर

    कटुता मेटा मोनक एक बनि ने रहबै

    एकटा प्रश्न-चिह्न उठतैक गीता-कुरानपर

    अपने भवन जरा कऽ सुख-चैन जे तकैए

    अफसोच भऽ रहल अछि तेहन नादानपर

    अगुआ बनल-ए भारत शान्ति हेतु सदिखन

    सभ मन्त्र उड़ि रहल छैक अन्हड़-तूफानपर

    ककरो कोना बुझयबै राकस जखन निमन्त्रित

    गरदनि सभक छै लटकल धरगर कृपाणपर

    स्रोत :
    • पुस्तक : पहरा इमानपर (मैथिली गजल-संग्रह) (पृष्ठ 4)
    • रचनाकार : बाबा बैधनाथ
    • प्रकाशन : गौरी प्रकाशन, कचहरी बलुआ, पूर्णिया
    • संस्करण : 1989

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