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जमहूरियत बेराम बा, कइसे कहीं गजल

jamhuriyat beram ba, kaise kahin gajal

ब्रजभूषण मिश्र

ब्रजभूषण मिश्र

जमहूरियत बेराम बा, कइसे कहीं गजल

ब्रजभूषण मिश्र

और अधिकब्रजभूषण मिश्र

    जमहूरियत बेराम बा, कइसे कहीं गजल

    सब लोग बेलगाम बा, कइसे कहीं गजल

    ना चैन, ना अराम बा, कइसे कहीं गजल

    तकदीर, यार, वाम बा, कइसे कहीं गजल

    इंसानियत के बात बा जेही इहाँ करत

    बदनाम ओकरे नाम बा, कइसे कहीं गजल

    लड़ लेतीं दम लगा के जो कुरुखेत एक हो

    हर ठावाँ-ठाईं लाम बा, कइसे कहीं गजल

    स्रोत :
    • पुस्तक : समय के राग (पृष्ठ 73)
    • संपादक : जगन्नाथ, भगवती प्रसाद द्विवेदी
    • रचनाकार : ब्रजभूषण मिश्र
    • प्रकाशन : भोजपुरी साहित्य प्रतिष्ठान, पटना
    • संस्करण : 2003

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