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जागल बा दिल

jagal ba dil

मिथिलेश ‘गहमरी’

मिथिलेश ‘गहमरी’

जागल बा दिल

मिथिलेश ‘गहमरी’

और अधिकमिथिलेश ‘गहमरी’

    जागल बा दिल में दुख-दरद संसार के

    तोहके, गजल कइसे सुनाई प्यार के

    मझधार साथे नाव के जब ठन गइल

    माँझी के, बा सुरता पड़ल पतवार के

    असमान में पवँरे के बेरा गइल

    बइठल कबूतर काँहे बा मन मार के

    सबकर अलग बा रंग, रौनक, रोशनी

    का, बाग से तुलना करीं बँसवार के

    ठहरे-ठहर कोठी खड़ा कइलस, मगर

    फुटपाथ सूते के मिलल बनिहार के

    काबा से, काशी के अलग रिश्ता कहाँ

    दूनो बसेरा एकही मलिकार के

    धरना, प्रदर्शन, जाँच, घोटाला, चुनाव

    एह देश में नइखे कमी तेवहार के

    दुनिया के नाचे-गावे दऽ तूरे द’ तान

    हमरा पता बाटे कि बा ओह पार के

    'मिथिलेश' अब आगे जवन होखे, मगर

    दीया हवा के सोझा राखब बार के

    स्रोत :
    • पुस्तक : केकरा से माँगीं अँजोर (पृष्ठ 46)
    • रचनाकार : मिथिलेश ‘गहमरी’
    • प्रकाशन : सत्यांश उपक्रम (प्रा.) लिमिटेड, बलिया
    • संस्करण : 2019

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