Font by Mehr Nastaliq Web

ई जिनगी ने जिनगी जहर भेल छै

ii jingi ne jingi jahar bhel chhai

कलानन्द भट्ट

कलानन्द भट्ट

ई जिनगी ने जिनगी जहर भेल छै

कलानन्द भट्ट

और अधिककलानन्द भट्ट

    जिनगी ने जिनगी जहर भेल छै

    आइ सभठाम घरापर कहर भेल छै।

    शांति सूतल सिनेहक कतहु कोरमे

    क्रांति उन्मादिनी विष लहर भेल छै।

    भेल सीमांत केर रंग भटरंग सन

    भोरमे भावना दूपहर भेल छै।

    आदमी आदमीसँ घृगामे डुबल

    कोन खूनी युगक पहर भेल छै।

    नूनसँ खून सस्ता बनल जा रहल

    द्वेष केर बाट सभ अग्रसर भेल छै।

    स्रोत :
    • पुस्तक : कान्ह पर लहास हमर [मैथिली गजल संग्रह] (पृष्ठ 19)
    • रचनाकार : कलानन्द भट्ट
    • प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
    • संस्करण : 1983

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY