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गिद्ध सभ मंडरा रहल

giddh sabh manDra rahal

विभूति आनंद

विभूति आनंद

गिद्ध सभ मंडरा रहल

विभूति आनंद

और अधिकविभूति आनंद

    ई समाज व्यवस्था, अकान लागैए

    अजग्गि भेलि धिया, सुनसान लागैए

    पसरल संस्कृतिक, डम्फा'छि बाजि रहल

    छतहर केर जिनगी, वरदान लागैए

    फूसि पण्डित, फूसि काजी, फूसि ई संसार

    हाक्रोश पर हाक्रोश, अग्निबाण लागैए

    गिद्ध सभ मड़रा रहल, संवेदनाक संग

    से दानो मे दान, महादान लागैए

    घीया केर पीया लए, जीया अछि रकटल

    मुदा हमर करम, उपटल बथान लागैए

    स्रोत :
    • पुस्तक : उठा रहल घोघ तिमिर (पृष्ठ 35)
    • रचनाकार : विभूति आनन्द
    • प्रकाशन : भारती संस्थान, पटना
    • संस्करण : 1981

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