भेल बहुत उठू युवक! क्रांतिक आह्वान करू
bhel bahut uthu yuvak! krantik ahvan karu
कलानन्द भट्ट
Kalanand Bhatt
भेल बहुत उठू युवक! क्रांतिक आह्वान करू
bhel bahut uthu yuvak! krantik ahvan karu
Kalanand Bhatt
कलानन्द भट्ट
और अधिककलानन्द भट्ट
भेल बहुत उठू युवक! क्रांतिक आह्वान करू
गन्हकल परिपाटी ई तिलकक अवसान करू
बीकू जुनि माल जकाँ, हाटपर मनुक्ख अहाँ
चढ़ा डाकपर ने अपनाकेँ नीलाम करू
लोभ कोन? गंगा सन पावन सम्बन्ध बीच
विधि केर विधानकेँ श्रद्धासँ सम्मान करू
जिनगी केर पूर्णता, प्रकृति ओ पुरुष अहाँ
पजरि रहल प्रीति, ने कंसारक निर्माण करू
बन्धु! आाब अबला, ने अबला रहत जानि लिअ
सहत कते दर्द कठिन, हुँकारत ज्ञान करू
- पुस्तक : कान्ह पर लहास हमर [मैथिली गजल संग्रह] (पृष्ठ 30)
- रचनाकार : कलानन्द भट्ट
- प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
- संस्करण : 1983
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