बात मन में रहे, अब बहर गइल बा
baat man mein rahe, ab bahr gail ba
बात मन में रहे, अब बहर गइल बा
दुःख त खासे रहे, अब पसर गइल बा
भाव हिरदा में उठ के अब का करी
जब अभावे से जिनगी ई भर गइल बा
तेज झोंका हवा के अब डेरवाई का
आन्ही केतना इहाँ से गुजर गइल बा
कवनो इच्छा अब ना खुशी के रहल
लोर आँखिन से अपना त ढर गइल बा
जान आदमी के साँसत में एतना रहल
जिनगी जोअत बा, आदमी मर गइल बा
- पुस्तक : अचके कहा गइल [ग़ज़ल-संग्रह] (पृष्ठ 12)
- रचनाकार : ब्रजभूषण मिश्र
- प्रकाशन : कबीर भोजपुरी पुस्तकालय, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1992
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.