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बात मन में रहे, अब बहर गइल बा

baat man mein rahe, ab bahr gail ba

ब्रजभूषण मिश्र

ब्रजभूषण मिश्र

बात मन में रहे, अब बहर गइल बा

ब्रजभूषण मिश्र

और अधिकब्रजभूषण मिश्र

    बात मन में रहे, अब बहर गइल बा

    दुःख खासे रहे, अब पसर गइल बा

    भाव हिरदा में उठ के अब का करी

    जब अभावे से जिनगी भर गइल बा

    तेज झोंका हवा के अब डेरवाई का

    आन्ही केतना इहाँ से गुजर गइल बा

    कवनो इच्छा अब ना खुशी के रहल

    लोर आँखिन से अपना ढर गइल बा

    जान आदमी के साँसत में एतना रहल

    जिनगी जोअत बा, आदमी मर गइल बा

    स्रोत :
    • पुस्तक : अचके कहा गइल [ग़ज़ल-संग्रह] (पृष्ठ 12)
    • रचनाकार : ब्रजभूषण मिश्र
    • प्रकाशन : कबीर भोजपुरी पुस्तकालय, मुजफ्फरपुर
    • संस्करण : 1992

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