अपहरण भऽ रहल, सरेआम सड़कपर
apahran bhaऽ rahal, saream saDakpar
अपहरण भऽ रहल, सरेआम सड़कपर
अछि देखि रहल लोक, सरेआम सड़कपर
आतंकक वातावरण करमीक लत्ती सन
पछि पसरल सभ ठाम, सरेआम सड़कपर
लोभ केर वेश्याक फँसल रूप जालमे
अछि दल-सदल लड़ैछ, सरेआम सड़कपर
बम केर धमाका हैत कखन कोम्हरसँ
अछि क्यो ने जनैछ, सरेआम सड़कपर
आन्हर ओ जकरा पर निर्भर व्यवस्था
अछि थाहि रहल आइ, सरेआम सड़कपर
- पुस्तक : कान्ह पर लहास हमर [मैथिली गजल संग्रह] (पृष्ठ 44)
- रचनाकार : कलानन्द भट्ट
- प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
- संस्करण : 1983
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