Font by Mehr Nastaliq Web

आदमी के का भरोसा

adami ke ka bharosa

कृष्णानन्द कृष्ण

कृष्णानन्द कृष्ण

आदमी के का भरोसा

कृष्णानन्द कृष्ण

और अधिककृष्णानन्द कृष्ण

    आदमी के का भरोसा कब बदल जाई

    बात पर उनका भला कइसे रहल जाई

    रात भर बरसत रहल हऽ नेह के बरखा

    ना जुड़ाइल हऽ हिया कइसे कहल जाई

    हर गली हर मोड़ पर आतंक बा पसरल

    देख के केकर करेजा ना दहल जाई

    बात पर बिसवास ना केहू करत इहवाँ

    जार कब तक कहीं असहीं सहल जाई

    जब गजल में प्रेम के कुछ बात होई तब

    'कृष्ण' सबका घाव पर मलहम मलल जाई

    स्रोत :
    • पुस्तक : नया सूरज चढ़ल जाता (पृष्ठ 29)
    • रचनाकार : कृष्णानन्द कृष्ण
    • प्रकाशन : पुनः प्रकाशन, पटना
    • संस्करण : 2000

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY