सिया जी के अँसुवा में जिनिगी नहाय
siya ji ke ansuva mein jinigi nahay
रामजियावान दास ‘बावला’
Ramjiyaavan Das ‘Bawla’
सिया जी के अँसुवा में जिनिगी नहाय
siya ji ke ansuva mein jinigi nahay
Ramjiyaavan Das ‘Bawla’
रामजियावान दास ‘बावला’
और अधिकरामजियावान दास ‘बावला’
प्रभु का बताईं किछु कहियो न जाय,
सिया जी के अँसुवा में जिनिगी नहाय॥
भरतैं सगरवा उमड़ि जाती नदिया।
लगतीं न जउ कि बियोगवा क अगिया।
बात फुलवरिया के रखलीं जोगाय,
सिया जी के अँसुवा में जिनिगी नहाय॥
कबले कुबोलिया दसानन क सहबै।
कहलीं की कहि देइहा दुइ पाख रहबै।
डर हव कि देइहैं परनवा पठाय,
सिया जी के अँसुवा में जिनिगी नहाय॥
कहिहा की लछिमन के मत ठुकरइहैं।
करनी हमार प्रभुसब बिसरइहैं।
मुँदरी अँगुरिया में नाहीं ठहराय,
सिया जी के अँसुवा में जिनिगी नहाय॥
जिव बावला बाटै कहिया ले अइहैं।
सोनवा के गढ़ लंक मटिया मिलइहैं।
देखली विपतिया न हमसे कहाय,
सिया जी के अँसुवा में जिनिगी नहाय॥
- पुस्तक : गीतलोक (पृष्ठ 102)
- रचनाकार : रामजियावान दास ‘बावला’
- प्रकाशन : सेवक प्रकाशन, वाराणसी
- संस्करण : 1997
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