डिम डिम डमरू बजावेला हमार जोगिया
Dim Dim Damru bajavela hamar jogiya
रामजियावान दास ‘बावला’
Ramjiyaavan Das ‘Bawla’
डिम डिम डमरू बजावेला हमार जोगिया
Dim Dim Damru bajavela hamar jogiya
Ramjiyaavan Das ‘Bawla’
रामजियावान दास ‘बावला’
और अधिकरामजियावान दास ‘बावला’
डिम डिम डमरू बजावेला हमार जोगिया।
गरवा सोहै मुन्ड माला, अंग में लपटे नाग काला,
छाला शेर के बिछावैला हमार जोगिया।
नाचे भूत प्रेत के संग, सदा रहै अड़बंग,
भंग धतूरा चबावैला हमार जोगिया।
बूढ़े बैला पर सवार, चन्दा सोहे ला लिलार,
धार गंगा क बहावैला हमार जोगिया।
अइसन बावला न कोई, जइसन शम्भु मोरा होई,
जोई माँगै सोई लुटावैला हमार जोगिया।
- पुस्तक : गीतलोक (पृष्ठ 28)
- रचनाकार : रामजियावान दास ‘बावला’
- प्रकाशन : सेवक प्रकाशन, वाराणसी
- संस्करण : 1997
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