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ये शरद के फूल

ye sharad ke phool

ओम निश्चल

ओम निश्चल

ये शरद के फूल

ओम निश्चल

और अधिकओम निश्चल

    वे शरद के फूल

    कोमल कुहुकते पल छिन

    याद करना मुंबई में

    लखनऊ के दिन!

    बैठ चौपाटी

    समंदर देखना

    बहुत मुश्किल

    मगर अंदर देखना

    और घड़ियाँ प्रतीक्षा की

    काटना गिन-गिन।

    याद करना मुंबई में

    लखनऊ के दिन।

    वे अदाएँ लखनऊ की

    चपल सखियाँ

    भूल पाएँगी

    कहाँ वे शोख बतियाँ

    उस नवाबी छटा का वह रंग रोगन

    कहाँ से लाऊँ तुम्हारे बिन।

    याद करना मुंबई में

    लखनऊ के दिन।

    बावरा मन

    कहीं भी टिकता नहीं है

    भीड़ में भी यह मगर

    थकता नहीं है

    भागता ज्यों तनी रस्सी पर

    खोजता है चैन हर पल छिन।

    याद करना मुंबई में

    लखनऊ के दिन!!

    स्रोत :
    • रचनाकार : ओम निश्चल
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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