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खास बात

khaas baat

तैयब हुसैन पीड़ित

और अधिकतैयब हुसैन पीड़ित

    दिन दूर जात बा

    पीठे रात बा

    परछाइयों अपन

    रे आह-पाँत बा

    पूरब के भइल खून

    अबो सूख ना पावल

    कि लऽ! लहू-लुहान

    पछिम होत जात बा

    हादसा के सूत बा कातत कवन कबीर?

    जिनगी से असमसान ले तानी तनात बा!

    सीता के जरल आग

    ना ठंढा भइल कबो

    अब तेल से लाफ

    अउर लहलहात बा

    रावण के बात छोड़ीं

    समुन्दर के पार बा

    शंबुक के गला राम के

    हाथन कटात बा

    पंडुक के बेंधल देख के जे फूट के बहल

    अब डबडबा के आँख ओकर सूख जात बा!

    आदम से आज ले

    जे पयम्बर देले सबक

    दाता इयाद बा

    दान भूल जात बा

    मजहब के आँख आदमी में

    का लगल कि अब

    अपना जगह लोग के

    अनका जनात बा

    कमजोर जन के तोख ला ईश्वर गढ़ल गइल

    बा साफ कि बरियार से मात खात बा!

    फेंकऽ लिखल हिसाब

    अब मुंशी के बही के

    रहलो थाह लइका

    जहाँ डूब जात बा

    पंडित के सिखावल सुआ

    कबले करम पढ़ी?

    अपना भरोसा करऽ

    खास बात बा!

    'अन्हरा घरे के भूत से डरबऽ कहाँ-कहाँ?

    मन के भरम साँप रसी लउक जात बा!

    स्रोत :
    • पुस्तक : अनसोहातो (कविता-संग्रह) (पृष्ठ 36)
    • रचनाकार : तैयब हुसैन पीड़ित
    • प्रकाशन : शब्द संसार, पटना
    • संस्करण : 2011

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