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पतिया लिखि हो देतू

patiya likhi ho detu

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

पतिया लिखि हो देतू

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

    सुनि लेतू सखिया, हमरी मनवा के बतिया,

    पतिया लिखि हो देतू।

    सजना के तूहीं समुझाइ,

    पतिया लिखि हो देतू॥...

    साहेब के सलाम लिखिहऽ।

    नीचे हमार नाम लिखिहऽ॥

    बिचवा में लिखिहऽ हमरी,

    मनवाँ के बतिया॥ पतिया...

    चढ़ते सावन सैंया घरे चलि आईं।

    बाटे हमार किरिया देर जनि लगाईं॥

    रुपिया ना पइसा चाहीं,

    ना कवनो सौगतिया॥ पतिया...

    हमरो नयनवां बरिसे जइसे सवनवां।

    काहे चोराइ लिहलऽ हमरो चयनवां॥

    दिनवां बीतेला कइसो,

    कटे नाही रतिया॥ पतिया...

    चिटिया लिखाईं हम अँसुआ गिराइके।

    सुधियो ना लेनी परदेसवा में जाइके॥

    कवन सवतिया मरलसि,

    राउर बा मतिया॥ पतिया...

    स्रोत :
    • पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 56)
    • रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
    • प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
    • संस्करण : 2010

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