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नेहक अनुबन्ध

nehak anubandh

अशोक कुमार मेहता

अशोक कुमार मेहता

नेहक अनुबन्ध

अशोक कुमार मेहता

और अधिकअशोक कुमार मेहता

    सिहकी शरद केर नहुएँ सिहकि रहल

    धानक फूलसँ बाट सभ गमकि रहल

    आउ कने सहटि प्रिय अंग-रंग एक हो

    चानन-देह-गंध नाग-मन रमकि रहल

    दिन थोड़े तबधल साँझ सोहनगर

    अहाँ केर संग-साथ पल-पल रमनगर

    हरिणायल आँखि दुनू काजरसँ घेरल

    बीचमे टिकुली चकमक चमकि रहल

    शीतसँ नहाएल राति दपदप इजोरिया

    अबैत जाइत मेघ जनु काटए अहुरिया

    आँचरमे भरि दी आँजुर भरि सिंगरहार

    सेनुरायल भोरमे ऊषाकर उचकि रहल

    नेह केर अनुबन्ध युग-युग चलैत रहए

    हमर सभक प्रेमगीत दुनियाँ गबैत रहए

    कोसीक कछेरमे झिलहरि खेलाइत

    बीतल कतेक दिन आइयो कचकि रहल

    स्रोत :
    • पुस्तक : पंछी बनी गगन केर… (मैथिली गीत-संग्रह) (पृष्ठ 123)
    • रचनाकार : अशोक कुमार मेहता
    • प्रकाशन : अनुप्रास प्रकाशन, मधुबनी
    • संस्करण : 2024

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