Font by Mehr Nastaliq Web

नेह-छोह

neh chhoh

विभूति आनंद

विभूति आनंद

नेह-छोह

विभूति आनंद

और अधिकविभूति आनंद

    मन रे,

    जुनि तों राग अलाप!

    आइ विरह केर तप्त-कुंडमे

    मन-हिरणी ई तड़पय

    हमर व्यथा क्यो कान देथि नहि

    तिरछल तन ई तरसय

    किए हमर ऐ व्याकुल क्षणमे,

    तोहर ई परलाप!

    पिया-मिलन ले' आकुल ई पल

    ओ छथि गंगा-पार

    रोजी-रोटी आबि सुखौलक

    हम्मर प्रेमक धार

    ककरा कहबै, के पतियायत,

    असमय ई संताप!

    अल्प वयसमे सेनुर पड़ने

    बुझल न प्रेमक मर्म

    आइ जखन से अनुभव करितौं

    पेटक ताबा गर्म

    सोचि-सोचि जीवन के चिंता,

    बढ़ि रहलै उत्ताप!

    प्रियतम अहाँ जतऽ कत्तौ होइ

    विरहक पार उतारू

    'प्रेम तुच्छ थिक रोटिक आगू'

    हमरा नै परतारू

    प्रेमक सोझा तुच्छ सकल चित्

    'पिया-मिलन' तें जाप!

    स्रोत :
    • पुस्तक : पीयर रौद पियरगर धरती (गीत-संग्रह) (पृष्ठ 30)
    • रचनाकार : विभूति आनन्द
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2018

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY