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ओ युवाओं!

o yuvaon!

इति शिवहरे

अन्य

अन्य

इति शिवहरे

ओ युवाओं!

इति शिवहरे

और अधिकइति शिवहरे

    युवाओं! प्राण अक्षय,मर्त्य मृत्युंजय नहीं है।

    ज़िंदगी अभिनय नहीं है!

    ज़िंदगी मृदु-भावनाओं में सहज निष्णात होना।

    प्रेम की आराधना के प्रति विनय-प्रणिपात होना।

    ये मुखर आनंदमय अनुरक्ति की उत्सर्जना है।

    मौन यदि अन्याय पर,असुरारि-सुर की भर्त्सना है।

    वह नहीं जीवन कि कुंदन-आँच से परिचय नहीं है।

    ज़िंदगी अभिनय नहीं है!

    हर्ष होना चाहिए अवसाद में क्यों हो रहे हो?

    साधना के शुभ-समय में भोग में यदि खो रहे हो।

    मोह-माया-मोहिनी की रीति आकर्षित करेंगी।

    तामसी दुष्वृत्तियाँ हैं सर्वदा विचलित करेंगी।

    किंतु इनके अनुसरण की यह यथोचित-वय नहीं है।

    ज़िंदगी अभिनय नहीं है!

    छोड़ जठरानल अभी हे शूर दावानल बुझा लो!

    पुण्य-पथ पर पग बढ़ाओ हाथ गंगाजल उठा लो।

    खोल लो अब चक्षु अपने बाहुओं में जोश भर लो।

    घृणित-कलुषित कृत्य के अवितत समर उद्घोष कर लो।

    फिर सुनिश्चित है विजय संघर्ष में, संशय नहीं है।

    ज़िंदगी अभिनय नहीं है!

    स्रोत :
    • रचनाकार : इति शिवहरे
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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