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केवट बोलल रामचन्द्र से

kevat bolal ramchandr se

रामजियावान दास ‘बावला’

रामजियावान दास ‘बावला’

केवट बोलल रामचन्द्र से

रामजियावान दास ‘बावला’

और अधिकरामजियावान दास ‘बावला’

    केवट बोलल रामचन्द्र से हाथ जोरि अस बानी,

    बाबू राउर मरम हम जानीं।

    पाथर से नारी तू कइला, हमरे घाट दया करि अइला,

    एकै बिनती बाटइ हमरी नइया बहुत पुरानी,

    बाबू राउर मरम हम जानीं।

    पहिले राउर चरन पखरबै, फिर नदिया के पार उतरबै,

    मन में आवै बतलावा भरि कठवत जल आनी,

    बाबू राउर मरम हम जानीं।

    अगर चरन धोवावल चाहा, बेसी ना बतियावल चाहा,

    आगे से कुछ दूर उतर जा, बाटइ थोरिकै पानी,

    बाबू राउर मरम हम जानीं।

    कुटुम भरे नाव सहारा, कइसों कइसों करीं गुजारा,

    रत्ती भर झूठ कहीं जाने गंगा महरानी,

    बाबू राउर मरम हम जानीं।

    दुइ में एक करै के होई, दूसर बाय उपाय कोई,

    जो भावै सो कहा जल्द नइया से बा जिनगानी,

    बाबू राउर मरम हम जानीं।

    जउ नइया से बन गइ नारी, जाई कुल रोजी रोजगारी,

    बड़ा बावला होइ जइहैं मोरे घर के सकल परानीं,

    बाबू राउर मरम हम जानीं॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : गीतलोक (पृष्ठ 45)
    • रचनाकार : रामजियावान दास ‘बावला’
    • प्रकाशन : सेवक प्रकाशन, वाराणसी
    • संस्करण : 1997

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