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ककरा कहब निज बतिया हो रामा

kakra kahab nij batiya ho rama

अमित पाठक

अमित पाठक

ककरा कहब निज बतिया हो रामा

अमित पाठक

और अधिकअमित पाठक

    ककरा कहब निज बतिया हो रामा

    निन्दिया ने आबए

    पिया बिनु कटए नहि रतिया हो रामा

    विरह सताबए

    निन्दिया ना आबे रामा, विरह सताब

    ककरा कहब...

    कोइलीक कुहुक उठए चित मोरा

    तन-मन विलगि तक चहुँ ओरा

    गहल केहेन दुरमतिया हो रामा

    निन्दिया ना आबए

    ककरा कहब...

    सिहकि पवन सिहराबए अंगिया

    हुनकहि ताकए सजल पलंगिया

    लागल एहेन पिरितिया हो रामा

    निंदिया ना आबए

    ककरा कहब...

    बनल निठुर प्रियतम परदेसिया

    तेज मोहे देलनि केहन कलेशिया

    बिसरल हमर सुरतिया हो रामा

    निन्दिया ना आबए

    ककरा कहब...

    कओन जतन धरि पाएब खबरिया

    पियबा बसल जानि कओन नगरिया

    पठबए ने एकहु पतिया हो रामा

    निन्दिया ना आबए

    ककरा कहब...।

    स्रोत :
    • पुस्तक : राग-उपराग (पृष्ठ 47)
    • रचनाकार : अमित पाठक
    • प्रकाशन : नवारम्भ
    • संस्करण : 2017

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