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जीवन के सारे आभार याद करना!

jivan ke sare abhar yaad karna!

ओम निश्चल

ओम निश्चल

जीवन के सारे आभार याद करना!

ओम निश्चल

और अधिकओम निश्चल

    विचलित हो मन जब

    तुम मुझे याद करना।

    सुख के बीते लम्हे—

    प्यार याद करना।

    यादों की पगडंडी

    कितना उलझाती है

    जब अतीत की गठरी

    खुलती ही जाती है

    सुख के सब स्पंदन

    यों पीछा करते हैं

    भूली-बिसरी बातें

    दिल बहुत दुखाती हैं

    उजले उजले दिखते हैं

    धुंधले-धुंधले दिन

    रसभीने मौसम की

    मार याद करना।

    कितना कुछ दुर्निवार

    जीवन का लेखा है

    कैसा होगा जीवन

    कल किसने देखा है

    जिसके संग बीते हैं

    बहुतेरे मीठे पल

    वे पल कब रूठ जाएं

    कल किसने देखा है!

    वर्तमान को हरदम

    बाहों में भर जीना

    जीवन के सारे—

    आभार याद करना।

    गीत कोई गंध कोई

    जीवन हो छंद कोई

    ऐसे दुलराना मन—

    जैसे मकरंद कोई

    सारे अपमान-मान

    विस्मृत कर यह जहान

    फिर-फिर रचना नूतन

    मन से अनुबंध कोई।

    पाना क्या खोना क्या?

    ऊसर में बोना क्या?

    सावन-भादों की

    जलधार याद करना।

    स्रोत :
    • रचनाकार : ओम निश्चल
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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