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जीवन : एक परिबोधन

jivan ha ek paribodhan

छत्रानन्द सिंह झा

छत्रानन्द सिंह झा

जीवन : एक परिबोधन

छत्रानन्द सिंह झा

और अधिकछत्रानन्द सिंह झा

    अहाँ आबी ने आबी,

    अपन सुधिकेँ

    अयबासँ मना ने करू!

    अहाँक रूप हमर स्वर

    मिलल महाकाव्य बनल

    लेपा गेल आखर

    उड़िया गेल पन्ना

    बात हमर मानी जँ

    प्रेमक इतिहासक उपहास ने करू!

    जीवन केर फानीमे

    सुख-दुख दुइयेटा,

    सृष्टिक आरम्भोमे

    हम-अहाँ दुइयेटा,

    एतनी टा खटपटमे

    मानिनि राधा-सन झट रोष ने करू।

    बिसरि जाइ सब किछु

    मोन रहय एतबेटा

    बिन्दु या परिधि जकाँ

    हम अहाँ सनातन

    समयक सब खेल अछि

    पल-दू-पलक दुखक एना गेंठ ने धरू।

    स्रोत :
    • पुस्तक : एक गुलाबक लेल (पृष्ठ 28)
    • रचनाकार : छत्रानन्द सिंह झा
    • प्रकाशन : नीलकण्ठ प्रकाशन, पटना
    • संस्करण : 1988

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