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बदनाम कइसे होई

badnam kaise hoi

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

    बगिया बबुरी लगइब तऽ आम कइसे होई।

    साथ सन्तन के कबो बदनाम कइसे होई॥

    माई-बाप के उपकार जे भुलाई।

    नरको में कतहूं सरन नाही पाई॥

    बिनु सेवा के इनकी चारो धाम कइसे होई॥

    बगिया बबुरी लगइबऽ...

    जवनी सुरतिया पर नीयति खराब बा।

    मनवा के तोहरी खूलत किताब बा॥

    धागा राखी के कबो बदनाम कइसे होई॥

    बगिया बबुरी लगइबऽ...

    जइसन करबऽ तू कीरति कमाई।

    जग के लोगवा तोहार गुन गाई॥

    हीरा मटिया में रहि बेदाम कइसे होई।

    बगिया बबुरी लगइबऽ...

    एक तऽ करेला, दूसरे निमिया चढ़ल।

    मनवा में बा तोहरी जहर भरल।

    अधीर मनवा पर तोहरी लगाम कइसे होई॥

    बगिया बवुरी लगइबऽ...

    स्रोत :
    • पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 34)
    • रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
    • प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
    • संस्करण : 2010

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