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घर हमारा है

ghar hamara hai

मनोज जैन

मनोज जैन

घर हमारा है

मनोज जैन

और अधिकमनोज जैन

    स्वर्ग से सुंदर,

    बड़ा प्यारा बड़ा न्यारा,

    घर हमारा।

    घर कि जिसमें,

    बज रही है,

    रामधुन संतूर वाली।

    प्यार से दादा खिलाते,

    खिलखिला,

    हँसती मिताली।

    है सभी की ख़ुशी का

    यह देनहारा,

    घर हमारा।

    भूल छोटी या बड़ी हो,

    हर किसी को,

    माफ़ करता है।

    एक घर ही तो,

    सभी के साथ में,

    इंसाफ़ करता है।

    थके-हारे प्राण,

    तन-मन का सहारा,

    घर हमारा।

    भूल से भी द्वार-देहरी,

    का नहीं,

    अपमान करना।

    शांति-सुख का झरा,

    करता यहाँ,

    आठों याम झरना।

    हर किसी की आँख का,

    रौशन सितारा,

    घर हमारा।

    ह्रदय में रखना,

    बसाकर या,

    नयन की कोर में।

    घर सभी को,

    बाँधता है,

    एकता की डोर में।

    प्रेम सब पर,

    है लुटाता ढ़ेर सारा,

    घर हमारा।

    स्रोत :
    • रचनाकार : मनोज जैन
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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