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दुपहरियाक रौदमे

dupahariyak raudme

गंगेश गुंजन

गंगेश गुंजन

दुपहरियाक रौदमे

गंगेश गुंजन

और अधिकगंगेश गुंजन

    एतऽ ओतऽ जतऽ ततय

    एकहि रंग उदासी

    पसरल अट्टहास करैत

    कपलेश्वर काशी

    पेट भेल अछि धनुष

    भूख बेरोजगारी,

    नेताकेर पयरमे लेटायल युवा पीढ़ी—

    सेवारत क्रीत दास कऽ रहल खबासी।

    बीसम सदीक एहि उन्नत जनतंत्रमे

    सत्ताकेर राजनीति—

    मंदिर मसजिद धर्मक ठीकेदारीक

    पोसुआ मधुमाछीक

    मधुक व्यापार करय

    पटना करांची। सभ टा देशेक नामे।

    काव्य प्रवासी—

    समय केहन असह दुःखक

    लोक वेद विकल व्यग्र अपन अपनी

    उनटल नावक लोक जकाँ माँझ धार

    हाथ पैर मारि मारि—

    डूबयसँ बचबा लेल डूबि रहल

    ऊब डूब करैत

    मृत्युमुखी छोड़ैत उसाँसी।

    बह-बह महगीक पजार

    डाहि-डाहि गाम-गाम

    कतओक एकचारीमे सूतल नेना समेत

    कयल सुड्डाह, बच्छा-गाय।

    बोनिक दू सेर कोनो अन्न—

    मसुरी कि नबका राहड़ि कि खेसाड़ी

    सब टा खकस्याह करैत।

    मात्र वर्ष सैंतीसक एक तरुण

    बेशी आबादीकेँ तबाह करैत—

    मात्र मनुक्ख सन लगैत व्यवस्था।

    तथापि जयनगरसँ दिल्ली भरि छपैये

    घोखैये तनैये जनकल्याणी उपक्रम

    नव अर्थ कर्मसूत्र बीस-बीस

    वर्ष सन् उनैस सय चौरासी।

    आब मुदा बौक बहिर जनता नहि सुनैये

    एहन लोकतंत्र दम्मा उकासी।

    चुपचाप पेट हाथ बान्हि कऽ अकानि रहल

    बनल साकांक्ष तैयार—

    दुपहरियाक रौदमे,

    नव पनगल छोट छिन गाछक छाहरिमे

    एका एकी जमा भऽ रहल किए हकासल पियासल

    मुक्तिक प्रत्याशी

    विपतिक रौदकेँ बितयबा लेल

    किछु गोटय एक टा

    नव गाछ तर।

    स्रोत :
    • पुस्तक : दुःखक दुपहरिया (पृष्ठ 28)
    • रचनाकार : गंगेश गुंजन
    • प्रकाशन : क्रान्तिपीठ प्रकाशन, पटना
    • संस्करण : 1999

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