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देखहक हौ गान्धी बाबा!

dekhhak hau gandhi baba!

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

देखहक हौ गान्धी बाबा!

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

और अधिकचन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

    देखहक हौ गान्धी बाबा तोरो स्वराजमे, लाखो करै छह काँहि-काँहि हौ!

    पेटमे अन्न छै देहपर कपड़ा,

    घरमे खर्ची ने चारपर खपरा,

    जेठक चण्डाल दुपहरिया नचै छै, कागा डकै छै टाँहि-टाँहि हौ!

    ढन-ढन पड़ल छै घरमे कोठी,

    लोक बनल अछि फाँड़ल पोठी,

    भात खयनिहारकेँ ने अल्हुआ जुड़ै छै, सब क्यो करै अछि फाँहि-फाँहि हौ!

    दिनकर तपौने जाइ छथि धरती,

    धरती से बाँझ पड़ल बनि परती,

    करती बहुआसिन की चुलहा जरा कऽ, नेना करै छनि खाँहि-खाँहि हौ!

    चेला चाटी से बनलऽ अपावन,

    अयलै महा पपिआहा सतावन,

    लाबनपर डिबिया से छुच्छे पड़ल छै, टेमी जरै छै छाँहि-छाँहि हौ!

    जीर सन उपजलै गहुमक दाना,

    आबि गेलै अगिलगुआ जमाना,

    छोटका-मझोलकाक बात की कहिअह, बड़को खसै छै धाँहि-धाँहि हौ!

    स्रोत :
    • पुस्तक : चन्द्रनाथमिश्र ‘अमर’ रचना संचयन (पृष्ठ 300)
    • संपादक : योगानन्द झा, शम्भुनाथ झा, विजयदेव झा
    • रचनाकार : चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’
    • प्रकाशन : साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2025

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