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चान अहाँ चिन्हाएल लगै छी

chaan ahan chinhayel lagai chhi

अमित पाठक

अमित पाठक

चान अहाँ चिन्हाएल लगै छी

अमित पाठक

और अधिकअमित पाठक

    चान अहाँ चिन्हाएल लगै छी

    बरु किछु-किछु बिसराएल लगै छी

    सोझाँ-सोझी कि सपनामे

    कहियो कतौ टकराएल लगै छीन

    चान अहाँ...

    खन लागए जे मन-मन्दिरमे

    अहीं केर हो बास जेना

    खन फेर होइए बीतल समय संग

    भेल कोनो परिहास जेना

    असमंजसमे नैन पड़ल अछि

    हमहुँ धरि ओझराएल लगै छी

    चान अहाँ...

    घुरि-घुरि मोन पड़ैए दिन

    अपरुव रूप प्रियतमकेँ

    घनगर छाहरि भ्रमर कुसुम संग

    दैत गवाही संगमकेँ

    जानि कोना फेर धार विमुख भेल

    दू दिस बहि कतिआएल लगै

    चान अहाँ...

    की जोगी-तपसी के जप-तप

    जेहेन हमर-अहाँक छलै

    प्रीत अगाध अछैतो संजम

    करिते दिन बीति गेलै

    विधि केर यएह विधान असलमे

    तकरहि नाच नचाएल लगै छी

    चान अहाँ...।

    स्रोत :
    • पुस्तक : गीत-गगन (पृष्ठ 25)
    • रचनाकार : अमित पाठक
    • प्रकाशन : नवारम्भ
    • संस्करण : 2024

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