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अगर महराज न बदलवा

agar mahraj na badalva

रामजियावान दास ‘बावला’

रामजियावान दास ‘बावला’

अगर महराज न बदलवा

रामजियावान दास ‘बावला’

और अधिकरामजियावान दास ‘बावला’

    छुटि जाई अब कै समाज, अगर महराज बदलवा॥

    वायुयान मोटर अब चलती बैल होत सवारी।

    अगर कोई चढ़ि चलै बैल पर होल दिलग्गी भारी।

    नारी भी ना चाहैं पुरुष के अट पर साज, अगर महराज बदलवा॥

    साधू और सन्यासी भी अब बाँधे घड़ी कलाई।

    फ्लैक्स का जूता चलैं पहन लेकर सिगरेट सलाई।

    भलाई बाटै तोहरे हक में आज, अगर महराज बदलबा॥

    ना कोई डिम-डिम डमरू बजावै ना कोई त्रिशूलधारी।

    सुख से सोवै लगा रेडियो टेबुल पर मुड़तारी।

    सारी बात बदल गई दुनियाँ फैसनबाज, अगर महराज बदलवा॥

    भंग छान मत बना 'बावला' सोचा तनिक विचारा।

    अगर इण्डिया कै सुख चाहा तो बदल के रूप पधारा।

    टारा बात हमरी भूतन के सिरताज, अगर महराज बदलबा॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : गीत मंजरी
    • संपादक : हरिराम द्विवेदी, जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
    • रचनाकार : रामजियावान दास ‘बावला’
    • प्रकाशन : सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2021

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