Font by Mehr Nastaliq Web

दर्पण केरी गुफा में

darpano kerii gufaa me

कबीर

कबीर

दर्पण केरी गुफा में

कबीर

और अधिककबीर

    दर्पण केरी गुफा में, स्वनहा पैठा धाय।

    देखि प्रतीमा आपनी, भूँकि-भूँकि मरि जाय॥

    मानो एक कुत्ता दौड़कर दर्पणों के किसी कक्ष में घुस गया और दर्पणों में अपने शरीर के प्रतिबिंब देखकर तथा उन्हें अपने प्रतिद्वंदी एवं वैरी मानकर उनके विरोध में भूंक-भूंककर मर गया। इसी प्रकार मनुष्य अपने मन की कलुषित भावनाओं की प्रतिछाया दूसरे लोगों में आरोपित कर उनसे राग-द्वेष कर और लड़-झगड़कर अपने जीवन को बरबाद करता है।

    स्रोत :
    • पुस्तक : बीजक: पारख प्रबोधिनी व्याख्या (पृष्ठ 436)
    • संपादक : अभिलाष दास
    • रचनाकार : कबीर
    • प्रकाशन : कबीर पारख संस्थान
    • संस्करण : 1969

    संबंधित विषय

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY