अन−उद्यमही एक कौ
an−.udyamhii ek kau
अन−उद्यमही एक कौ यौं हरि करत निबाह।
ज्यौं अजगर भख आनि कै निकसत बाही राह॥
भावार्थ: कवि कहते हैं कि इस संसार के रचनाकार भगवान इस धरती पर न काम करने वालों का भी निर्वाह करते हैं, क्योंकि वे संसार के प्राणियों के पालनहार हैं, इसलिए सभी के भोजन की व्यवस्था कर देते हैं। भगवान ने बिना परिश्रम के निर्वाह करने के लिए एक ही प्राणी की रचना की है। जैसे अजगर किसी का भक्षण करता है तो वह भक्षित जीव उसी रास्ते से वापस निकल जाता है। भाव यह है कि बिना परिश्रम के खाने वाला प्राणी सुखी नहीं रह सकता है।
- पुस्तक : सतसई सप्तक (पृष्ठ 287)
- संपादक : श्यामसुंदर दास
- प्रकाशन : हिंदुस्तानी एकेडमी
- संस्करण : 1931
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