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अगर चँदण की सिर घड़ी

agar chandan ki sir ghaDi

जमाल

जमाल

अगर चँदण की सिर घड़ी

जमाल

और अधिकजमाल

    अगर चँदण की सिर घड़ी, बिच बींटली गुलाल।

    एक दरसण हम कियो, तीरथ जात जमाल॥

    अगर और चंदन के दो घड़े, जिन के मध्य में गुलाल (लाल रंग) की बीटली (गाँठ) थी, तीर्थ यात्रा को जाते हुए ऐसे दृश्य के दर्शन हुए। गूढ़ार्थ यह है कि कवि ने किसी स्त्री के अगर तथा चंदन से चर्चित कुचों को देखा, जिनकी घुंडी लाल रंग से रँगी थीं। स्वेत, श्याम, और लाल रंग से सौंदर्य प्रेमी कवि को त्रिवेणी (गंगा, यमुना और सरस्वती) के दर्शन हो गए, तब भला वह तीर्थ जाने की यात्रा का क्यों कष्ट झेलता?

    स्रोत :
    • पुस्तक : जमाल दोहावली
    • संपादक : महावीर सिंह गहलोत
    • प्रकाशन : पुस्तक भवन
    • संस्करण : 1945

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