आज़मगढ़ के रचनाकार

कुल: 10

मलयज

1935 - 1982

हिंदी के उल्लेखनीय कवि-आलोचक। अपनी डायरियों के लिए विशेष चर्चित, लेकिन अब अलक्षित।

अठारहवीं सदी के संत कवि। पदों में हृदय की सचाई और भावों की निर्भीक अभिव्यक्ति। स्पष्ट, सरल, ओजपूर्ण और मुहावरेदार भाषा का प्रयोग।

कवि और गद्यकार। खड़ी बोली हिंदी के प्रथम महाकाव्य 'प्रिय प्रवास' के रचनाकार।

भारतेंदु युग के सुपरिचित लेखक। इनका स्मरण हिंदी साहित्य के प्रथम उत्थान का स्मरण है।

समय : 18वीं सदी। बावरी पंथ ग़ाज़ीपुर शाखा के संत गुलाल साहब के शिष्य। चमत्कार-विरोधी। नाम-स्मरण के सुगम पथ के राही।

नई पीढ़ी की कवयित्री। लोक-संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

परंपरागत आदर्श पर विशेष बल देने वाली भारतेंदु युग की कवयित्री।

नई पीढ़ी के कवि-लेखक।

अज्ञेय द्वारा संपादित ‘चौथा सप्तक’ के कवि।