सिग्री उन्सेत के उद्धरण
अगर मैं वास्तव में उतनी ही प्रतिभाशाली होती; जितनी मैं ख़ुद को समझती थी, तो बहुत पहले जान जाती कि जीवन का अर्थ अंततः मनुष्यों से ही बनता है।
अनुवाद : रचित
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