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Periyar E. V. Ramasamy's Photo'

पेरियार ई. वी. रामासामी

1879 - 1973 | तमिलनाडु

पेरियार ई. वी. रामासामी की संपूर्ण रचनाएँ

उद्धरण 17

प्रेम मनुष्यता के लिए नैसर्गिक उपहार है।

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'पतिव्रता' शब्द स्पष्ट रूप से स्त्री-पराधीनता की स्थिति को दर्शाता है। केवल इसलिए कि इसका अभिप्राय ऐसी पत्नी से है जो, 'अपने पति को भगवान का दर्जा देती है; पति की दासी बनकर रहने को ही जो अपना 'संकल्प' (व्रत) मान लेती है, और अपने पति के अलावा वह किसी अन्य पुरुष का विचार तक नहीं रखती।' इसलिए भी कि 'पति' शब्द का आशय ही स्वामी, रहनुमा और सर्वेसर्वा से है।

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महानतम लक्ष्य, जो मेरे जीवन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है—वह है शूद्रों को बनियों और ब्राह्मणों के चंगुल से मुक्त कराना।

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यदि कोई व्यक्ति प्रेमियों की मनःस्थिति का सूक्ष्म निरीक्षण करे; तो यह समझ जाएगा कि प्रेम की उत्पत्ति के मूल में मनुष्य की निजी इच्छाएँ, और व्यक्तिगत संतुष्टि की खोज की भावना अंतनिर्हित होती है।

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जब तक दुनिया में 'मर्दानगी' का बोध क़ायम है, स्त्रियों की पराधीनता बढ़ती ही जाएगी।

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