बाबू सुथार का परिचय
जन्म और शिक्षा :
• जन्म : 1 जून, 1955 को भरोड़ी (तहसील : वीरपुर, ज़िला : महिसागर, गुजरात) में हुआ।
• प्राथमिक शिक्षा : भरोड़ी और जीतपुरा से।
• माध्यमिक शिक्षा : वीरपुर से।
• उच्च शिक्षा : सेठ पी.टी. आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज, गोधरा, गुजरात से बी.ए. (गुजराती-हिंदी) किया। इसके बाद एम.एस. यूनिवर्सिटी, बड़ौदा, गुजरात से गुजराती और भाषाविज्ञान (Linguistics) में दो एम.ए. किए।
• विशेष शिक्षा : यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेंसिलवेनिया [University of Pennsylvania (USA)] से भाषाविज्ञान में पी.एच.डी. की। इसके बाद सिनेमा स्टडीज (Cinema Studies) में एक और एम.ए. किया (डेजर्टेशन बाक़ी होने के कारण डिग्री नहीं ली)।
व्यवसाय और अनुभव :
• शुरुआत में गोधरा और वडोदरा में टेलीफ़ोन ऑपरेटर के रूप में काम किया।
• संतरामपुर, गुजरात और मुंबई, महाराष्ट्र के कॉलेजों में गुजराती के प्रोफ़ेसर रहे।
• 'गुजरात समाचार' और 'संदेश' जैसे गुजराती के प्रतिष्ठित अख़बारों में सब-एडिटर के पद पर कार्य किया।
• एम.एस. यूनिवर्सिटी में भाषाविज्ञान के प्रोफ़ेसर रहे।
• वर्तमान में, यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेंसिलवेनिया (USA) में गुजराती भाषा और संस्कृति पढ़ा रहे हैं (बीच में क़रीब पाँच साल उन्होंने हेल्थ केयर क्षेत्र में भी सेवाएँ दीं)।
साहित्यिक योगदान :
• उपन्यास (Novels): काचंडो अने दर्पण (1991), श्रीमद् कागडापच्चीसी (2001), वाक्यकथा (2001), वळगाड (2003/2014), निद्रावियोग (2003)।
• कविता संग्रह (Poetry Collection): गुरुजाप अने मांल्लुं (2003) , सापफेरा (2004), विषादमहोत्सव (2004), नदीचालीसा (2004), घरझुरापो (2010), डोशी, बापा अने बीजां काव्यों (2023), उद्वेग (2023), अथातो इलिकाजिज्ञासा (2024), लखवुं एटले के (2024)।
• आलोचना (Criticism): घणउठाव (2013), चोतरेथी (2013) , अन्यत्र (2023), 'बाबू सुथारनी पछीतेथी' [संपादक: मनोज रावल (2023)]
• अनुवाद (Translation): ईश्वरनो संताप (2009) शीर्षक से फ्रेंच कवि आलां बॉस्क [Alain Bosquet (1919–1998)] की कविताओं का अनुवाद और जूल रेनार [Jules Renard (1864–1910)] की कविताओं का अनुवाद जनावरोनी जानमां शीर्षक से प्रकाशित (2023)।
• संपादन: दस वर्षों तक गुजराती साहित्यिक पत्रिका 'सन्धि' का संपादन किया और वर्तमान में गुजराती की महत्त्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिका 'ऊहापोह-2' पत्रिका के संपादक हैं।
रुचि के क्षेत्र : दर्शनशास्त्र (Philosophy), साहित्य, मानवशास्त्र (Anthropology), डिजिटल संस्कृति, सिनेमा (विशेषकर छोटे देशों की फ़िल्में) और समकालीन राजनीतिक घटनाएँ।