Font by Mehr Nastaliq Web

पुरस्कार के अधिकारी

puraskar ke adhikari

तेनालीराम

तेनालीराम

पुरस्कार के अधिकारी

तेनालीराम

और अधिकतेनालीराम

    विजय नगर की राजधानी में अनेक रामलीलाएँ होती थीं। रामलीलाओं का मौसम आते ही कलाकारों की मंडलियाँ सक्रिय हो उठती। जगह-जगह मंच बन जाते और कलाकार अभ्यास करने लगते।

    कहीं रामजी की सवारी निकालने की तैयारी होती, तो कहीं श्रवण कुमार-दशरथ नाटक मंचन की तैयारी। सभी मंडलियों को यूँ तो राजदरबार से प्रोत्साहन राशि मिलती थी, किंतु इस बार महाराज ने एक अलग ही घोषणा की इस बार जो सबसे अच्छी रामलीला होगी, उसे राज-पुरस्कार दिया जाए। इसके लिए एक समिति बनाई गई। समिति में राज पुरोहित, सेनापति और मंत्री शामिल हो गए।

    तेनालीराम को जान-बूझकर समिति में नहीं लिया गया। तय हुआ कि समिति ही राज-पुरस्कार के लिए रामलीला का चुनाव करेगी। समिति के सदस्य जगह-जगह जाकर रामलीला देखने लगे। निश्चित दिन उन्होंने राजा को बता दिया कि अनुक रामलीला सर्वश्रेष्ठ है।

    राजा ने तेनालीराम से कहा, “अब तुम एक समारोह का प्रबंध करो। इसी में उस रामलीला के मुख्य आकर्षण दिखाए जाएँगे और पुरस्कार भी दिया जाएगा। तेनालीराम ने भरे दरबार में कहा, “महाराज, समिति ने सर्वश्रेष्ठ रामलीला का चुनाव सचमुच बड़ी सूझ-बूझ से किया है।

    क्यों हो, यह रामलीला सर्वश्रेष्ठ कलाकारों ने की है। इस रामलीला मंडली वालों ने सदस्यों का भरपूर स्वागत किया है। उन्हें रेशमी शाल के साथ-साथ चंदन की बनी मूर्तियाँ और उत्तम किस्म का एक-एक शंख भी भेंट किया है। समिति के सदस्यों को मेरी बधाई।

    सुनकर राजा चौंके। पता चल गया कि इसी प्रलोभन के कारण समिति ने उस मंडली की रामलीला को सर्वश्रेष्ठ ठहराया है। राजा ने तेनालीराम से राय ली। वह बोला, “महाराज! यह पुरस्कार तो बालमंडली की रामलीला को मिलना चाहिए।

    पुरस्कार से प्रोत्साहन पाकर बचे आगामी वर्ष और भी उत्साह से रामलीला करेंगे। इसी बहाने बच्चे भगवान राम के सद्गुणों से प्रेरणा भी लेंगे।” सभी दरबारियों ने तेनालीराम की बात का समर्थन किया। अपनी दाल गलते देखकर राजपुरोहित सेनापति और मंत्री शर्म से पानी-पानी हो रहे थे।

    स्रोत :
    • पुस्तक : चर्चित एवं लोकप्रिय कहानियाँ “तेनालीराम” (पृष्ठ 130)
    • रचनाकार : तेनालीराम
    • प्रकाशन : प्रशांत बुक डिस्ट्रीब्यूटर
    • संस्करण : 2018

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY