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यह एक भौतिक सिद्धांत है कि भंग न पीनेवाले को
श्रीलाल शुक्ल
भंग पीनेवालों में भंग पीसना एक कला है
भंग पीनेवालों में भंग पीसना एक कला है, कविता है, कार्यवाई है, करतब है, रस्म है।
श्रीलाल शुक्ल
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संसार की सामान्यता को भंग करना ही साहित्य का उद्देश्य है
संसार की सामान्यता को भंग करना ही साहित्य का उद्देश्य है और यह काम रचनाकार शब्दों की मदद से करता है।
कृष्ण कुमार
जब सुई की आवाज़ भी ज़ुर्म समझी गई
जब सुई की आवाज़ भी ज़ुर्म समझी गईताली बजाई मैंने बार-बार