अवनींद्रनाथ ठाकुर के उद्धरण
ज़बरदस्ती कोई काम करना और आंतरिक प्रेरणा के साथ करते जाना— इन दोनों के भेद से कलात्मक कर्म में कुछ विशेष ही घट जाता है। एक से तो हमें सच्ची कला मिलती है और दूसरे से मिथ्या कला का आभास-भर मिलता है।
-
संबंधित विषय : जिज्ञासा